Tuesday, 2 January 2018

भारत का इतिहास - प्राचीन भारत एव भारत प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत

भारत का इतिहास उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में समुद्र तक फैला यह उपमहाद्वीप भारतवर्ष के नाम से जाना जाता है| जिसे महाकाव्य तथा पुराणों में भारतवर्ष अर्थात् भरत का देश तथा यहां के निवासियों को भारतीय अर्थात् भरत की संतान कहा जाता है |यूनानियों ने भारत को इंडिया तथा मध्यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने हिंदी अथवा हिंदुस्तान के नाम से संबोधित किया है|


भारतीय इतिहास को अध्ययन की सुविधा के लिए तीन भागों में बांटा गया है |
प्राचीन भारत मध्यकालीन भारत एवं आधुनिक |
भारत प्राचीन
भारत प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत
प्राचीन भारतीय इतिहास के विषय में जानकारी मुक्ता चार स्त्रोतों से प्राप्त होती है एक धर्म ग्रंथ दो ऐतिहासिक ग्रंथ 3 विदेशियों का विवरण चार है पुरातत्व संबंधी साक्ष्य
धर्म ग्रंथ एवं ऐतिहासिक ग्रंथ से मिलने वाली महत्वपूर्ण जानकारी भारत का सर्व प्राचीन धर्म ग्रंथ वेद है जिसके संकलनकर्ता महर्षि कृष्ण वेद व्यास को माना जाता है विचार है ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद अथर्ववेद

  • ऋग्वेद

रचनाओं के क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्वेद कहा जाता हैइसमें 10 मंडल 1028 सूक्त एवं 10462 रचनाएं हैं विश्वामित्र द्वारा रचित ऋग्वेद के तीसरे मंडल में सूर्य देवता सावित्री को समर्पित प्रसिद्ध गायत्री मंत्र है इसके नवी मंडल में देवता सोम का उल्लेख है |
इसके आठवीं मंडल की हस्त लिखित रचनाओं को खिललकहा जाता है|
चातुर्वर्ण्य समाज की कल्पना का आदि स्रोत ऋग्वेद के 10 मंडल में वर्णित पुरुष सूक्त है जिसके अनुसार चार वर्ण हैं ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य तथा शूद्र आदि पुरुष ब्रह्मा के प्रमुख भुजाओं जांगो और चरणों से उत्पन्न हुए |
नोट धर्मसूत्र चार प्रमुख जातियों की स्थितियां व्यवसाइयों दायित्वों करते हुए तथा विशेषाधिकारों में स्पष्ट विभेद करता है ईसा पूर्व एवं इसवी

  • वर्तमान में प्राचीन ग्रेगोरियन कैलेंडर ईसाई धर्मगुरु ईसा मसीह के जन्म वर्ष पर आधारित हैं ईसा मसीह के जन्म के पहले के समय को ईसा पूर्व कहा जाता है इस अपूर्व में वर्षों की गिनती उलटी दिशा में होती है जैसे महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में हुआ मृत्यु 483 ईसा पूर्व में हुई 
  • ईसा मसीह की जन्म तिथि से आरंभ हुआ सन ईसवी सन कहलाता है इसके लिए संक्षेप में ही लिखा जाता है कि को लेटिन भाषा के शब्द एडी में भी लिखा जाता है 
  • वामनावतार के तीन भागों के आख्यान का प्राचीनतम स्रोत ऋग्वेद है 
  • ऋग्वेद में इंद्र के लिए 250 तथा अग्नि के लिए 200 रचनाओं की रचना की गई 
  • नोट प्राचीन इतिहास के साधन के रुप में वैदिक साहित्य में ऋग्वेद के बाद शतपथ ब्राह्मण का स्थान है यजुर्वेद 
  • सस्वर पाठ के लिए मंत्रों तथा बली के समय अनुपालन के लिए नियमों का संकलन यजुर्वेद कहलाता है इसके पाठ करता को अध्वर्यु कहते हैं यह एक ऐसा वेद है जो गद्य एवं पद्य दोनों में है 
  • सामवेद यह गाए जा सकने वाली रचनाओं का संकलन है इसके पाठ करता को रुद्राक्ष कहते हैं किसे भारतीय संगीत का जनक कहा जाता है 
  • अथर्ववेद अथर्व ऋषि द्वारा रचित किस वेद में रोग निवारण तंत्र मंत्र जादू टोना शॉप वंशीकरण आशीर्वाद स्तुति प्राश्चित औषधि अनुसंधान विवाह प्रेम राजकरण मातृभूमि महात्म आधी विविध विषयों से संबंध मंत्र तथा सामान्य मनुष्य के विचारों विश्वासों अंधविश्वासों इत्यादि का वर्णन है अथर्वेद कन्याओं के जन्म की निंदा करता है 
  • इसमें सभा एवं समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां कहा गया है 
  • नोट सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद एवं सबसे बाद का वेद अथर्व वेद है 
  • वेदों को भली भांति समझने के लिए अच्छे वेदांगों की रचना हुई है यह है शिक्षा ज्योतिष कल्प व्याकरण निरुक्त तथा छंद 
  • भारतीय ऐतिहासिक कथाओं का सबसे अच्छा क्रमबद्ध विवरण पुराणों में मिलता है इसके रचयिता लोमहर्ष अथवा उनके पुत्र उग्रश्रवा माने जाते हैं इनकी संख्या 18 है जिसमें से केवल 5:00 मत्स्य वायु विष्णु ब्राह्मण भागवत में ही राजाओं की वंशावली पाई जाती हैं 
  • नोट पुराणों में मत्स्यपुराण सबसे प्राचीन एवं प्रमाणित है 
  • अधिकतर पुराण सरल संस्कृत श्लोक में लिखे गए हैं इस दुनिया तथा शुद्ध जिन्हें वेद पढ़ने की अनुमति नहीं थी वह भी पुराण सुन सकते थे पुराण का पाठ पूजा करते थे 
  • स्त्री की सर्वाधिक गिरी हुई स्थिति  मैत्रिणी संहिता  से प्राप्त होती ह जिसमें जुआ और शराब की बातें की स्त्री को पुरुष करती है श्रम मुख्य दोष बताया गया है  
  • शतपथ ब्राह्मण में स्त्री को पुरुष का अर्धांगिनी  कहां गया है  
  • स्मृति ग्रंथों में सबसे प्राचीन एवं प्रमाणित मनुस्मृति मानी जाती है यह शुभ कालका माता जरूरत है नारद स्मृति गुप्त युग के विषय में जानकारी प्रदान करता है 
  • जातक में बुद्ध के पूर्व जन्म की कहानी वर्णित है हीनयान का प्रमुख ग्रंथ कथावस्तु है जिसमें महात्मा बुद्ध का जीवन चरित्र अनेक कथा अंकों के साथ वर्णित है 
  • जैन साहित्य को आगमन कहा जाता ह जैन का प्रारंभिक इतिहास कल्पसूत्र से  ज्ञात होता है जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में महावीर के जीवन करते हो तथा अन्य संचालकों के साथ उनके संबंधों का विवरण मिलता है 
  • अर्थशास्त्र के लेखक चाणक्य कोटिल्य विष्णुगुप्त हैं यह 15 अधिकरणों 180 प्रकरणों में विभाजित है इसमें मौर्यकालीन इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है 
  • संस्कृत साहित्य में ऐतिहासिक घटनाओं को कर्म पर लिखने का सर्व प्रथम प्रयास कल के द्वारा किया गया कर्म द्वारा रचित पुस्तक राजतरंगिणी है जिसका संबंध कश्मीर के इतिहास से है 
  • अरबों की सिंध विजय का वृतांत चचनामा लेखक अली अहमद मैं सुरक्षित है 
  • अष्टाध्याई संस्कृत भाषा व्याकरण की प्रथम पुस्तक के लेखक पाणिनि है इसमें मोदी के पहले का इतिहास तथा मोदी योगी राजनीतिक अवस्था की जानकारी प्राप्त होती है 
  • कत्यायन  गार्गी संहिता एवं ज्योतिष ग्रंथ है फिर भी इसमें भारत पर होने वाले युवक आक्रमण का उल्लेख मिलता है 
  • पतंजलि पुष्यमित्र शुंग के पुरोहित थे महाभारत से शुभ के इतिहास का पता चलता है 
      विदेशी यात्रियों से मिलने वाली प्रमुख जानकारी
      यूनानी रोमन लेखक 
  • टेसियस यह ईरान का राज वेद था भारत के संबंध में इसका विवरण आश्चर्यजनक कहानियों से परिपूर्ण होने के कारण अंधविश्वास 
  • हेरोडोटस इसे इतिहास का पिता भी माना जाता है इसने अपनी पुस्तक स्टोरी का में पांचवी शताब्दी ईसा पूर्व के भारत फारस के संबंध का वर्णन किया है परंतु इसका विवरण भी अनुश्रुति एवं अफवाहों पर आधारित है 
  • सिकंदर के साथ आने वाले लेखकों में निर्याकस, आनेसिक्र्ट्स  तथा आस्टिबुलस  के विवरण अधिक प्रमाणिक एवं विश्वसनीय है 
  • मेगस्थनीज यह सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था जो चंद्रगुप्त मौर्य के राज दरबार में आया था इसने अपनी पुस्तक इंडिका में मोदी योगी समाज एवं संस्कृति के विषय में लिखा है 
  • डाईमेकस  यह सीरियल नरेश आरती यू किसका राजदूत था जो बिंदुसार के राज दरबार में आया था इसका विवरण भी बोरी युग से संबंधित है 
  • डायोनिसियस सुरेश कॉलनी सिलेबस का राजदूत था जो अशोक के राज दरबार में आया था 
  • टॉलमी इसलिए दूसरी शताब्दी में भारत का भूगोल नामक पुस्तक लिखी 
  • पिल्नी  प्रथम शताब्दी में नेचुरल हिस्ट्री नामक पुस्तक लिखी इसमें भारतीय पशुओं पेड़-पौधों खनिज पदार्थों आदि के बारे में विवरण मिलता है 
  • पेरिप्लस ऑफ द ईरिथ्र्यन सी इस पुस्तक के लेखक के बारे में जानकारी नहीं है यह लेखक करीब 80 ईसवी में हिंद महासागर की यात्रा पर आया था इसलिए उस समय के भारत के बंदरगाहों तथा व्यापारिक वस्तुओं के बारे में जानकारी दी है 
चीनी लेखक 
  • फहियान यह चीनी यात्री गुप्त नरेश चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार में आया था इसलिए अपने विवरण में मध्य प्रदेश के समाज एवं संस्कृति के बारे में वर्णन किया है इसलिए मध्य प्रदेश की जनता को सुखी और समृद्ध बताया है 
  • संयुगन  यह 518 ईस्वी में भारत आया इसने 3 वर्षों की यात्रा में बौद्ध धर्म की प्राप्ति एकत्रित की 
  • ह्वेनसॉन्ग यह हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था वह शो 63280 में चीन से भारत वर्ष के लिए प्रस्थान किया और लगभग 1 वर्ष की यात्रा के बाद सर्वप्रथम यह भारतीय राज्य कपिशा पहुंचा भारत में 15 वर्षों तक ठहर का 64590 चीज लुट गया वह बिहार में नालंदा जिला स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन करने तथा भारत में बौद्ध ग्रंथों को एकत्रित कर ले जाने के लिए आया था इस का भ्रमण वर्तमान पुस्तक से प्राप्त होता है जिसमें 138 देशों का विवरण मिलता है इसलिए हर्ष कालीन समाज धर्म तथा राजनीति के बारे में वर्णन किया है इसके अनुसार सिद्ध का राजा शुद्ध था 
  • नोट ह्वेनसॉन्ग  के अध्ययन के समय नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति आश्चर्य शीलभद्र थे 
  • इत्सिंग यह सातवीं शताब्दी के अंत में भारत आया इसलिए अपने विवरण में नालंदा विश्वविद्यालय विक्रमशिला विश्वविद्यालय तथा अपने समय के भारत का वर्णन किया है 
अरबी लेखक 
  • अलबरूनी यह महमूद गजनवी के साथ भारत आया था अरबी में लिखी गई उसकी कृति किताब अल हिंद या तहकीक ए हिंद भारत की खोज आज भी इतिहासकारों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है यह एक विस्तृत ग्रंथ है जो धर्म और दर्शन त्योहारों खगोल विज्ञान कीमिया रीति रिवाजों तथा प्रथाओं सामाजिक जीवन भार तोल तथा मापन विधियो मूर्ति कला का कानून बाप तंत्र विज्ञान आदि विषयों के आधार पर 80 अध्यायों में विभाजित है इसमें राजपूत कालीन समाज धर्म रीति रिवाज राजनीति आदि पर सुंदर प्रकाश डाला गया है 
  • इब्नेबतूता इसके द्वारा अरबी भाषा में लिखा गया उसका यात्रा वृतांत जिसे रिला कहा जाता है जब वी शताब्दी में भारतीय उपमहाद्वीप के सामाजिक तथा सांस्कृतिक जीवन के विषय में बहुत ही प्रचुर तथा सबसे रोचक जानकारियां देता है 1333 ईसवी मैं दिल्ली पहुंचने पर इसकी विद्वता से प्रभावित होकर सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक ने उसे दिल्ली का काजी या न्यायाधीश नियुक्त किया 
अन्य लेखक 
  • तारानाथ यह एक तिब्बती लेखक था इसने कबनूर तथा तंदूर नामक ग्रंथ की रचना की इसने भारतीय इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है 
  • मार्कोपोलो यह तेरी शताब्दी के अंत में पांडे देश की यात्रा पर आया था इसका विवरण पांडे इतिहास के अध्ययन के लिए उपयोगी है पुरातत्व संबंधी साक्ष्य से मिलने वाली जानकारी 
  • 1400 पूर्व में के अभिलेख बोगाजकोई एशिया माइनर से वैदिक देवता मित्र वरुण इंद्र नाश्ता अश्विनी कुमार के नाम मिलने हैं 
  • मध्य भारत में भागवत धर्म विकसित होने का प्रमाण एवं राजदूत हेलियोडोरस के रेस नगर विदिशा गरुड़ स्तंभ लेख से प्राप्त होता है 
  • सर्वप्रथम भारतवर्ष का जिक्र हाथीगुंफा अभिलेख में है 
  • सर्वप्रथम दुर्भिक्ष का जानकारी देने वाला अभिलेख को गोरा नामक अभिलेख है 
  • सर्वप्रथम भारत पर होने वाले हूण आक्रमण की जानकारी भीतरी स्तंभ लेख से प्राप्त होती है 
  • सती प्रथा का पहला लिखित साक्ष्य एरण अभिलेख शासन भानुगुप्त से प्राप्त होती है 
  • रेशम बुनकर की श्रेणी की जानकारी मंदसौर अभिलेख से प्राप्त होती है 
  • कश्मीरी नवपाषाण पुरास्थल बुर्जहोम से गर्त आवास घंटाघर का साक्षी मिला है इसमें उतरने के लिए सीढ़ियां होती थी 
  • प्राचीनतम सिक्को को आहत सिक्के कहा जाता है इसी को साहित्य में का सार पढ़ कहा गया है 
  • सर्वप्रथम सिक्कों पर लेख लिखने का कार्य व शासकों ने किया 
  • समुद्रगुप्त की वीणा बजाती हुई मुद्रा वाले सिक्के से उसके संगीतप्रेमी होने का प्रमाण मिलता है 
  • अरिकमेडु पुदुच्चेरी के निकट से रोमन सिक्के प्राप्त हुए 
  • नोट सबसे पहले भारत के संबंध वर्मा वर्तमान में मयामार बलाया कंबोडिया और जावा से स्थापित हुए 
  • नोट अभिलेखों का अध्ययन इपीग्राफी कहलाता है|

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